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बल्लारपुर पेपर मिल: स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय, बाहरी राज्यों के ठेकेदारों का बोलबाला

samir wankhede beaureau chief :
बल्लारपुर: शहर की ‘जीवनरेखा’ कही जाने वाली बल्लारपुर पेपर मिल में इन दिनों स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों और ठेकेदारों में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि मिल प्रशासन स्थानीय लोगों को दरकिनार कर उत्तर प्रदेश और बिहार के ठेकेदारों को तरजीह दे रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए पुणे, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
पसंदीदा ठेकेदारों और कामगारों की ‘एंट्री’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेपर मिल में कार्यरत उत्तर प्रदेश और बिहार मूल के उच्च अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को विभिन्न कार्यों के ठेके दिए हैं। ये ठेकेदार स्थानीय मजदूरों के बजाय अपने साथ यूपी-बिहार से कामगारों को बुला रहे हैं। विडंबना यह है कि वर्षों से मिल से होने वाले जल और वायु प्रदूषण का दंश झेल रहे यहाँ के स्थानीय युवाओं को रोजगार के हक से वंचित रखा जा रहा है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय युवाओं का आरोप है कि जिले के सहायक कामगार आयुक्त इस गंभीर स्थिति की अनदेखी कर रहे हैं। वहीं, क्षेत्र के विधायक और ‘विकासपुरुष’ के नाम से चर्चित सुधीर मुनगंटीवार पर भी तीखे प्रहार किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन बार विधायक चुने जाने के बावजूद उन्होंने कभी भी पेपर मिल के कामगारों या बेरोजगारों के पक्ष में आवाज नहीं उठाई।
उद्योगों का बंद होना और बढ़ती बेरोजगारी
नागरिकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मुनगंटीवार के कार्यकाल में बल्लारपुर के कई प्रमुख उद्योग जैसे दादाभाई पॉटरी, बामणी प्रोटीन्स और प्लाईवुड फैक्ट्री बंद हो गए। नए उद्योग लगाना तो दूर, जो चालू थे वे भी बंद हो गए जिससे सैकड़ों परिवार सड़क पर आ गए। अब रही-सही कसर पेपर मिल में बाहरी राज्यों के लोगों की भर्ती कर पूरी की जा रही है।
फिलहाल, पेपर मिल प्रशासन और स्थानीय विधायक के खिलाफ शहर के युवाओं में भारी असंतोष है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस पलायन को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या स्थानीय युवा इसी तरह उपेक्षित रहेंगे।

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